Namita Chhiba, a resident of Panchsheel runs her own garage at Ashrum. Despite being the daughter of RK Dhawan a busnessman of Vintage cars and rich enough to gift her daughter with a Mercedes Benz, the lady is happy to work day and night in the dingy atmosphere of the garage in order to aspire her father’s dream. Dhawan owns two garage set ups - one at Kilokri & the other at Noida under the name Engineer’s Corporation. Namita who has spent 20 years of her life with the garage workers, is a prominent example of Indian women in the busines sector. Even though a mother of two, her affection for the garage which she has been visiting since childhood has not lessened. She has now taken over her father’s business completely and spends most of the day in supervising both the set-ups.
1:06 AM
To give a new breath to the river yamuna campaign, a Yamuna rally was organized on 22nd Feb 2009. The event was held in collaboration with the Delhi Based NGO ‘Accord’ at the Ansari auditorium of Jamia Millia Islamia University. The main aim of this event was to create awareness among people to keep Yamuna clean.
Lt. Governer of Delhi, Tejender Khanna was the chief guest. Other emient personalities who were present on the ocassion were Mayor of Delhi Aarti Mehra, K.S.Mehra, MCD Commisioner and Prof. Mushirul Hassan, Vice Chancellor, JMI. Students, NSS Volunteers, NCC Cadets, Eco Clubs, NGOs and MCD took part in the event.
Cultural programmes, prize distribution, 2-km long march were the additional attractions of the occasion
Lt. Governer of Delhi, Tejender Khanna was the chief guest. Other emient personalities who were present on the ocassion were Mayor of Delhi Aarti Mehra, K.S.Mehra, MCD Commisioner and Prof. Mushirul Hassan, Vice Chancellor, JMI. Students, NSS Volunteers, NCC Cadets, Eco Clubs, NGOs and MCD took part in the event.
Cultural programmes, prize distribution, 2-km long march were the additional attractions of the occasion
8:18 PM

गर्दन और पीठ में आमतौर पर उठने वाले दर्द को अक्सर लोग मामूली समझते हैं। यही मामूली दर्द गंभीर बीमारी का इशारा है। काम करने के ग़लत तौर तरीकों का परिणाम है "रिपीटीटिव स्ट्रेस इंजरी" यानी आर एस आई या यूँ कहें कि बार-बार दबाब का दर्द।
डॉक्टर संदीप गुप्ता ( ओर्थोपेडिक फिजियोथेरेपिस्ट ) है, इनका कहना है कि इस बीमारी के शिकार वो लोग ज़्यादा होते हैं जो घंटों कंप्यूटर पर काम करते हैं। घंटों काम करने से शरीर की किसी न किसी मांसपेशी पर ज़्यादा ज़ोर पड़ता है , जिसके कारण वो मांसपेशी कमजोर पड़ जाती है और काम करने में सक्षम नहीं रह पाती है। जिसके परिणामस्वरूप हमें अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में लगातार उठने वाले दर्द को सहना पड़ता है। डॉक्टर गुप्ता का मानना है कि यदि वक्त रहते इस बीमारी का इलाज नहीं कराया गया तो परेशानी इतनी बढ़ सकती है कि मरीज़ ना तो शर्ट का बटन लगा सकते हैं और ना ही चाय की प्याली उठा सकते हैं।
२३ वर्षीय मिनाक्षी, जो कनाट प्लेस के एच डी एफ सी बैंक में एक कंप्यूटर ओपरेटर है, मर दर्द से पीड़ित हैं। शुरू-शुरू में इन्होंने इस दर्द को सामान्य समझा पर दर्द के और बढ जाने पर डॉक्टर ने इन्हें आर एस आई से ग्रस्त बताया। पूरे तरीके से एक महीने का बैड रेस्ट और फिजियोथेरपी की सलाह दी।
२७ वर्षीय अमित शर्मा जो ग्राफिक्स डिजाइनर व डी टी पी ( डेस्कटॉप पब्लिशिंग ) ओपरेटर, जो आर एस आई से पीड़ित हैं। लगातार माउस पकड़ने के कारण इनकी कलाई की मांसपेशियां कमज़ोर पड़ गई हैं। आलम यह है की अब अमित जब कभी हाथों से कुछ पकड़ने की कोशिश करते है तो उनकी कलाई में भयानक दर्द शुरू हो जाता है।
डॉक्टर यश कुमार मान जो मौलाना आज़ाद हॉस्पिटल में सर्जन हैं, इनका कहना है कि यदि लोग रोज़मर्रा की जिंदगी में थोड़ा बदलाव लाएँ तो इस बीमारी से बचा जा सकता है। जैसे: लगातार काम करते हुए हर आधे घंटे में आराम लें, ६-८ हफ्तों में डॉक्टर से रूटीन चैकप करवाएं, योगा और मेडिटेशन के लिए सुबह १०-१५ मिनट ज़रूर निकालें, खान पान पर ध्यान दें, प्रोटीन अधिक खाएं।
डॉक्टर मान का यह भी कहना है कि बड़ी-बड़ी कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए महीने में एक बार आर एस आई की जागरूकता के लिए वर्कशॉप करानी चाहिए। इन्होने बताया कि ऐसा विदेशी कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए करती हैं।
ज्यादातर युवा वर्ग जिनकी औसत आयु तक़रीबन २२-२७ वर्ष के बीच होती है, आर एस आई के इन लक्षणों को गंभीरतापूर्वक नहीं लेते हैं। जिसके नतीजतन, यह मर्ज़ बढ़ते-बढ़ते महीनों बाद कईयों को नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर देता है।
आर एस आई के लक्षण
> दर्द
> जलन
> अकड़न
> सूजन
> सर्दी-जुकाम
> सुन्न होना या चेतनाशून्यता
बचाव के टिप्स
> लैपटॉप को गोद में ना रखे।
> लैपटॉप स्टैंड का ही प्रयोग करें ।
> कुर्सी के बैक रेस्ट पर पीठ की टेक लगाकर बैठें।
> टाइपिंग करते वक्त कलाई को सहारे के बिना रहने दें ।
Labels: गार्गी निम
1:34 AM
हिमाचल प्रदेश ( धर्मशाला ) के मक्लोड़गंज में बना तिब्बत चिल्ड्रेन विलेज, तिब्बत से आए शरणार्थी बच्चों का घर है। इस विलेज में ४३ होम हैं , जिनमें तकरीबन दो हजार बच्चे रहते हैं। प्रत्येक होम में ३०-४० बच्चे रहते हैं। इस विलेज में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ रोज़ मर्रा के कार्य भी सिखाये जाते हैं। इस विलेज को बनाने के पीछे तिब्बत से आए शरणार्थी बच्चों के उज्जवल भविष्य की सोच है।
Labels: photo feature: Gargi Nim
8:37 PM
नेत्रहीनों का नाम आते ही लोगों के दिमाग़ में जो चित्र अंकित होता है, वह है "सहानुभूति और दया "। आमतौर पर लोग इनकी इसी सहानुभूति की ज़िन्दगी से परिचित हैं । नेत्रहीनों के बारे में अक्सर लोग यही सोचते है की इनकी ज़िन्दगी बड़ी कठिन है , नेत्र ना होने के कारण यह कैसे अपना काम करते होंगे। छोटी-से छोटी चीज़ के लिए हर पल ज़िन्दगी से और अपने आप से ज़ंग करते होंगे।यह इनकी ज़िन्दगी का एक पहलु है , दुसरे पहलु का सच कुछ और है।
मैं आपको जिस लड़की से परिचित करा रही हूँ , यह उत्तर-प्रदेश के बलिया जिले से हैं। इनका नाम चंदा सागर है। साढ़े तीन साल की उम्र में इन्होंने बीमारी में अपनी आखें खो दी। ज़िन्दगी में अनेक कठिनाईयों का सामना करते हुए , आज ये दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित कॉलेज मिरांडा हाउस में प्राध्यापिका पद पर हैं। इनके शौक फ़िल्म देखना , घूमना , नए-नए पकवान बनाना और सुडोको खेलना एक आम व्यक्ति की तरह ही हैं।यह समाज से सहानुभूति की नहीं , सहारे की उम्मीद करती हैं। यह महिलाओं की जागरूकता के प्रति विशेष रुख रखती हैं , जिसका उदाहरण है इनकी एक कविता 'परिंदे उड़ना चाहते हैं । जिसकी कुछ पक्तियां इस प्रकार हैं .....
छोड़ दो आजाद हम परिंदों को ,
हम जी खोलकर आकाश में उड़ना चाहते हैं।
हम नहीं ओढेंगे इस समाज की ,
सडी-गली हुई मान्यताओं को।
इन अर्थहीन परम्पराओं को ,
मत लादो हम पर व्यर्थ में।
अब बहुत देर हो चुकी है ,
हम समय के संग पंख लगाकर उड़ना चाहते हैं ।
मैं आपको जिस लड़की से परिचित करा रही हूँ , यह उत्तर-प्रदेश के बलिया जिले से हैं। इनका नाम चंदा सागर है। साढ़े तीन साल की उम्र में इन्होंने बीमारी में अपनी आखें खो दी। ज़िन्दगी में अनेक कठिनाईयों का सामना करते हुए , आज ये दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित कॉलेज मिरांडा हाउस में प्राध्यापिका पद पर हैं। इनके शौक फ़िल्म देखना , घूमना , नए-नए पकवान बनाना और सुडोको खेलना एक आम व्यक्ति की तरह ही हैं।यह समाज से सहानुभूति की नहीं , सहारे की उम्मीद करती हैं। यह महिलाओं की जागरूकता के प्रति विशेष रुख रखती हैं , जिसका उदाहरण है इनकी एक कविता 'परिंदे उड़ना चाहते हैं । जिसकी कुछ पक्तियां इस प्रकार हैं .....
छोड़ दो आजाद हम परिंदों को ,
हम जी खोलकर आकाश में उड़ना चाहते हैं।
हम नहीं ओढेंगे इस समाज की ,
सडी-गली हुई मान्यताओं को।
इन अर्थहीन परम्पराओं को ,
मत लादो हम पर व्यर्थ में।
अब बहुत देर हो चुकी है ,
हम समय के संग पंख लगाकर उड़ना चाहते हैं ।
Labels: photo feature: Gargi Nim
9:17 PM
जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के अध्यापकों और विद्यार्थियों ने , मुंबई आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों और लोगों को श्रृधांजलि अर्पित की। यह कार्यक्रम ३ दिसम्बर २००८ , शाम ५;३० अंसारी ऑडिटोरियम के मैदान में संपन हुआ। सभी ने बड़ी संख्या में भाग लिया, मोमबत्ती जलाई और शहीदों की आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना की।

बूढी आंखों को शान्ति की उममीद
Labels: फोटो फीचर : गार्गी निम्
10:44 PM
चाचा नेहरू के बच्चों से अथाह प्रेम के कारण १४ नवंबर, उनके जन्मदिन का यह दिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन बच्चों के लिए ख़ुशी और आज़ादी का दिन है। साथ ही मौज मस्ती से कुछ पल निकालकर उन महान हस्तियों के जीवन से कुछ प्रेरणा लेने का भी दिन है, जिन्हें बच्चों से ख़ास लगाव था और उनकी बच्चों से बहुत सी उम्मीदें जुडी थी।
Labels: फोटो फीचर:गार्गी निम
Subscribe to:
Posts (Atom)












.jpg)








